हरियाणा फसल विविधीकरण योजना 2024-25: पूरी जानकारी (Crop Diversification Programme)
हरियाणा राज्य में लंबे समय से धान (Paddy) की खेती बहुत बड़े स्तर पर की जा रही है। धान एक ऐसी फसल है जिसमें बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसके कारण राज्य के कई जिलों में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है और मिट्टी की उर्वरता भी धीरे-धीरे कम हो रही है।
इन्हीं गंभीर समस्याओं को देखते हुए हरियाणा सरकार ने फसल विविधीकरण योजना (Crop Diversification Programme) शुरू की है, जिसे RKVY – राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 से और अधिक प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को धान की जगह कम पानी वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है।
फसल विविधीकरण योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य मकसद केवल खेती में बदलाव करना नहीं, बल्कि कृषि को टिकाऊ (Sustainable Agriculture) बनाना है। सरकार चाहती है कि किसान ऐसी फसलें उगाएं जिससे:
- भूजल का अत्यधिक दोहन कम हो
- पानी की बचत हो
- मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे
- किसानों की आय में वृद्धि हो
- खेती लंबे समय तक लाभकारी बनी रहे
धान की जगह किन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है?
इस योजना के अंतर्गत सरकार किसानों को धान की जगह निम्नलिखित कम पानी वाली फसलों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रही है:
- मक्का (Maize)
- बाजरा
- ज्वार
- दालें – मूंग, उड़द, अरहर आदि
- तिलहन फसलें – सरसों, तिल
- ग्वार
- कपास
- सब्जियां और बागवानी फसलें
ये सभी फसलें धान की तुलना में बहुत कम पानी में तैयार हो जाती हैं और किसानों को अच्छा मुनाफा भी दे सकती हैं।
किसानों को क्या लाभ मिलते हैं?
हरियाणा सरकार इस योजना के तहत किसानों को कई प्रकार के लाभ देती है, जिससे किसान आसानी से धान छोड़कर दूसरी फसल अपनाने का निर्णय ले सकें।
- धान की जगह वैकल्पिक फसल बोने पर प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है
- यह राशि सीधे किसान के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है
- कुछ फसलों पर बीज अनुदान (Subsidy on Seeds) की सुविधा
- कृषि विभाग द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन
- कृषि बीमा योजना का लाभ भी जोड़ा जाता है ताकि जोखिम कम हो
इस योजना से किसानों को न केवल आर्थिक लाभ मिलता है, बल्कि भविष्य में खेती अधिक सुरक्षित और स्थायी बनती है।
कौन-कौन किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ सामान्य पात्रता शर्तें होती हैं:
- आवेदक किसान हरियाणा राज्य का निवासी होना चाहिए
- किसान के पास स्वयं की कृषि भूमि हो या वैध रूप से पट्टे पर ली गई भूमि हो
- किसान को धान की जगह वैकल्पिक फसल बोनी होगी
- किसान का पंजीकरण “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल पर होना चाहिए
आवश्यक दस्तावेज़
योजना के लिए आवेदन करते समय निम्न दस्तावेज़ों की आवश्यकता पड़ सकती है:
- आधार कार्ड
- परिवार पहचान पत्र (PPP ID)
- बैंक पासबुक की कॉपी
- जमीन के कागजात
- मेरी फसल मेरा ब्योरा पंजीकरण
- मोबाइल नंबर
आवेदन कैसे करें?
हरियाणा फसल विविधीकरण योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। किसान निम्न स्टेप्स फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं:
- सबसे पहले “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल पर जाएं
- अपना पंजीकरण करें या लॉगिन करें
- अपनी फसल का विवरण दर्ज करें
- धान की जगह बोई गई वैकल्पिक फसल को अपडेट करें
- सभी जानकारी सबमिट करने के बाद आवेदन पूरा हो जाता है
सत्यापन के बाद सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है।
यह योजना क्यों है किसानों के लिए बेहद जरूरी?
आज के समय में पानी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यदि किसान लगातार केवल धान जैसी फसल पर निर्भर रहेंगे, तो आने वाले वर्षों में खेती करना मुश्किल हो सकता है। फसल विविधीकरण योजना किसानों को यह अवसर देती है कि वे:
- कम लागत में खेती करें
- कम पानी में बेहतर उत्पादन लें
- नई फसलों से नए बाजार खोजें
- अपनी आय के स्रोत बढ़ाएं
इसलिए यह योजना केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


